।।श्री चण्डिका मालामन्त्र प्रयोगः ।।
।।श्री चण्डिका मालामन्त्र प्रयोगः ।।
{चाथर्वणागमसंहितायाम्}
“ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ ह्रौं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीर्जयजय चण्डिका चामुण्डे चण्डिके त्रिदश-मुकुट-कोटि संघट्टित-चरणारविंदे गायत्रि सावित्रि सरस्वति अहिकृताभरणे भैरवरूप-धारिणि प्रकटित दंष्ट्रोग्र वदने घोरानन-नयने ज्वलज्ज्वाला-सहस्र-परिवृते महाट्टहास-धवलीकृत-दिगन्तरे सर्वयुग-परिपूर्णे कपाल-हस्ते गजाजिनोत्तरीय-भूत-वेताल-परिवृते अकंपित-धराधरे मधु-कैटभ महिषासुर-धूम्रलोचन चण्ड-मुण्ड-रक्तबीज-शुम्भनिशुम्भदैत्यनिकृन्ते कालरात्रि महामाये शिवे नित्ये ॐ ऐं ह्रीं ऐन्द्रि आग्नेयि याम्ये नैर्ऋति वारुणि वायवि कौबेरि ऐशानि ब्रह्म-विष्णु-शिव-स्थिते त्रिभुवन-धराधरे वामे ज्येष्ठे रौद्रि अम्बिके ब्राह्मी-माहेश्वरी कौमारी वैष्णवी वाराहींद्राणी-ईशानी-महालक्ष्मीः इति स्थिते महोग्रविषमहाविषोरगफणामणि मुकुटरत्न महाज्वाला मलमणिमहाहिहार बाहुकहोत्तमांग नवरत्ननिधि कोटितत्व बाहु जिह्वा-वाणी शब्द स्पर्श रूपरस-गंधात्मिके क्षितिसाहस मध्यस्थिते महोज्ज्वल महाविषोपविष-गंधर्वविद्या-धराधिपते ॐ ऐंकारा ॐ ह्रींकारा ॐ क्लींकारा हस्ते ॐ आँ ह्रीं क्रौं अनग्नेनग्नेपाते प्रवेशय प्रवेशय ॐ द्राँ द्रीं शोषय शोषय ॐ द्राँ द्रीं मोहय मोहय ॐ क्लाँ क्लीं दीपय दीपय ॐ ब्लूं ब्लूं संतापय संतापय ॐ सौं सौं उन्मादय उन्मादय ॐ म्लैं म्लैं मोहय मोहय ॐ खाँ खाँ शोधय शोधय ॐ द्याँ द्याँ उन्मादय उन्मादय ॐ ह्रीं ह्रीं आवेशय आवेशय ॐ स्त्रीं स्त्रीं उच्छादय उच्छादय ॐ स्त्रीं स्त्रीं आकर्षय आकर्षय ॐ हुँ हुँ आस्फोटय आस्फोटय ॐ त्रूँ त्रूँ त्रोटय त्रोटय ॐ छाँ छाँ छेदय छेदय ॐ कूँ कूँ उच्चाटय उच्चाटय ॐ हूँ हूँ हन हन ॐ ह्राँ ह्राँ मारय मारय ॐ घ्रीं घ्रीं घर्षय घर्षय ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूँ प्लूँ प्लावय प्लावय ॐ भ्रां भ्रां भ्रामय भ्रामय ॐ ॐ म्रां म्रां दर्शय दर्शय ॐ दां दां दिशां बंधय बंधय ॐ दीं दीं वर्तिनामेकाग्रचित्ताविशिकुरुतेंगये ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः ॐ फ्राँ फ्रीं फ्रूं फ्रैं फ्रौं फ्रः ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा मम सकलमनोरथं देहि सर्वोपद्रवं निवारय निवारय अमुकं वशे कुरु कुरु भूतप्रेतपिशाच ब्रह्मपिशाच ब्रह्मराक्षस-यक्ष यमदूत शाकिनीडाकिनी सर्वश्वापदतस्करादिकं नाशय नाशय मारय मारय भंजय भंजय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा”!!