।।नारायणाष्टोत्तर शतनामस्तोत्रं।।
।।नारायणाष्टोत्तर शतनामस्तोत्रं।।
नारायणाय सुरमण्डनमण्डनाय
नारायणाय सकलस्थितिकारणाय ।
नारायणाय भवभीतिनिवारणाय
नारायणाय प्रभवाय नमो नमस्ते ॥ १॥
नारायणाय शतचन्द्रनिभाननाय
नारायणाय मणिकुण्डलधारणाय ।
नारायणाय निजभक्तपरायणाय
नारायणाय सुभगाय नमो नमस्ते ॥ २॥
नारायणाय सुरलोकप्रपोषकाय
नारायणाय खलदुष्टविनाशकाय ।
नारायणाय दितिपुत्रविमर्दनाय
नारायणाय सुलभाय नमो नमस्ते ॥ ३॥
नारायणाय रविमण्डलसंस्थिताय
नारायणाय परमार्थप्रदर्शनाय ।
नारायणाय अतुलाय अतीन्द्रियाय
नारायणाय विरजाय नमो नमस्ते ॥ ४॥
नारायणाय रमणाय रमावराय
नारायणाय रसिकाय रसोत्सुकाय ।
नारायणाय रजोवर्जितनिर्मलाय
नारायणाय वरदाय नमो नमस्ते ॥ ५॥
नारायणाय वरदाय मुरोत्तमाय
नारायणाय अखिलान्तरसंस्थिताय ।
नारायणाय भयशोकविवर्जिताय
नारायणाय प्रबलाय नमो नमस्ते ॥ ६॥
नारायणाय निगमाय निरञ्जनाय
नारायणाय च हराय नरोत्तमाय ।
नारायणाय कटिसूत्रविभूषणाय
नारायणाय हरये महते नमस्ते ॥ ७॥
वारायणाय कटकाङ्गदभूषणाय
नारायणाय मणिकौस्तुभशोभनाय ।
नारायणाय तुलमौक्तिकभूषणाय
नारायणाय च यमाय नमो नमस्ते ॥ ८॥
नारायणाय रविकोटिप्रतापनाय
नारायणाय शशिकोटिसुशीतलाय ।
नारायणाय यमकोटिदुरासदाय
नारायणाय करुणाय नमो नमस्ते ॥ ९॥
नारायणाय मुकुटोज्ज्वलसोज्ज्वलाय
नारायणाय मणिनूपुरभूषणाय ।
नारायणाय ज्वलिताग्निशिखप्रभाय
नारायणाय हरये गुरवे नमस्ते ॥ १०॥
नारायणाय दशकण्ठविमर्दनाय
नारायणाय विनतात्मजवाहनाय ।
नारायणाय मणिकौस्तुभभूषणाय
नारायणाय परमाय नमो नमस्ते ॥ ११॥
नारायणाय विदुराय च माधवाय
नारायणाय कमठाय महीधराय ।
नारायणाय उरगाधिपमञ्चकाय
नारायणाय विरजापतये नमस्ते ॥ १२॥
नारायणाय रविकोटिसमाम्बराय
नारायणाय च हराय मनोहराय ।
नारायणाय निजधर्मप्रतिष्ठिताय
नारायणाय च मखाय नमो नमस्ते ॥ १३॥
नारायणाय भवरोगरसायनाय
नारायणाय शिवचापप्रतोटनाय ।
नारायणाय निजवानरजीवनाय
नारायणाय सुभुजाय नमो नमस्ते ॥ १४॥
नारायणाय सुरथाय सुहृच्छ्रिताय
नारायणाय कुशलाय धुरन्धराय ।
नारायणाय गजपाशविमोक्षणाय
नारायणाय जनकाय नमो नमस्ते ॥ १५॥
नारायणाय निजभृत्यप्रपोषकाय
नारायणाय शरणागतपञ्जराय ।
नारायणाय पुरुषाय पुरातनाय
नारायणाय सुपथाय नमो नमस्ते ॥ १६॥
नारायणाय मणिस्वासनसंस्थिताय
नारायणाय शतवीर्यशताननाय ।
नारायणाय पवनाय च केशवाय
नारायणाय रविभाय नमो नमस्ते ॥ १७॥
श्रियःपतिर्यज्ञपतिः प्रजापतिर्धियाम्पतिर्लोकपतिर्धरापतिः।
पतिर्गतिश्चान्धकवृष्णिसात्त्वतां
प्रसीदतां मे भगवान् सताम्पतिः ॥१८॥
त्रिभुवनकमनं तमालवर्णं
रविकरगौरवराम्बरं दधाने ।
वपुरलककुलावृताननाब्जं
विजयसखे रतिरस्तु मेऽनवद्या ॥१९॥
अष्टोत्तराधिकशतानि सुकोमलानि
नामानि ये सुकृतिनः सततं स्मरन्ति ।
तेऽनेकजन्मकृतपापचयाद्विमुक्ता
नारायणेऽव्यवहितां गतिमाप्नुवन्ति॥२०॥
इति नारायणाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥पूजन विधि
नारायणाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र — विधि 1️⃣ समय प्रातःकाल (सूर्योदय के बाद) सर्वोत्तम एकादशी, गुरुवार, पूर्णिमा, द्वादशी विशेष फलदायी नित्य पाठ भी किया जा सकता है 2️⃣ स्थान स्वच्छ एवं शांत स्थान पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख सामने भगवान श्रीहरि / नारायण / विष्णु की प्रतिमा या चित्र रखें 3️⃣ तैयारी स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र (पीला / सफेद) आसन पर बैठें (कुश, ऊन या साधारण वस्त्र) दीपक, धूप, तुलसीदल या पुष्प रखें 4️⃣ प्रारम्भ क्रम आचमन संकल्प गणेश स्मरण ध्यान (भगवान नारायण का) अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र पाठ यदि माला से करना हो तो तुलसी माला सर्वोत्तम मानी जाती है 5️⃣ पाठ की संख्या सामान्य साधना : 1 पाठ विशेष कामना : 3, 5 या 11 पाठ अनुष्ठान : 108 दिन तक प्रतिदिन 1 पाठ 6️⃣ पाठ विधि प्रत्येक नाम के अंत में “नमः” का उच्चारण करें मन, वाणी और भाव तीनों से भगवान का स्मरण रखें जल्दबाजी न करें, शुद्ध उच्चारण रखें 7️⃣ पाठ के बाद “ॐ नमो नारायणाय” 11 या 108 बार तुलसीदल या जल अर्पण शांति भाव से प्रार्थना
लाभ एवं महत्व
नारायणाष्टोत्तर शतनाम स्तोत्र — लाभ 🔹 1️⃣ मानसिक शांति चित्त की स्थिरता भय, चिंता और अशांति का नाश मन में वैराग्य और संतुलन 🔹 2️⃣ आध्यात्मिक लाभ विष्णु-तत्व की प्राप्ति भक्ति, श्रद्धा और स्मरण शक्ति में वृद्धि जप-तप में स्थिरता 🔹 3️⃣ कर्म और बाधा नाश पूर्वजन्म और वर्तमान कर्म बाधाओं में शमन अनावश्यक कष्ट और रुकावटें कम होती हैं जीवन में सहजता आती है 🔹 4️⃣ गृहस्थ जीवन में लाभ परिवार में शांति, प्रेम और स्थिरता वैवाहिक कलह में कमी संतुलित और सात्त्विक जीवन 🔹 5️⃣ स्वास्थ्य और आयु मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सहायक दीर्घायु और जीवन में स्थिरता 🔹 6️⃣ मोक्ष-मार्ग की सहायता यह स्तोत्र मोक्षमार्ग का द्वार खोलता है मृत्यु-भय और अज्ञान का क्षय नारायण स्मरण से परम शांति 🔹 7️⃣ विशेष फल एकाग्रता बढ़ती है पापक्षय और पुण्यवृद्धि भगवान नारायण की कृपा सदा बनी रहती है