।। श्री ललिता चालीसा ।। ललितामाता शम्भुप्रिया जगतिकि मूलं नीवम्मा श्री भुवनेश्वरि अवतारं जगमन्तटिकी आधारम् ॥ 1 ॥ हेरम्बुनिकि मातवुगा हरिहरादुलु सेविम्प चण्डुनिमुण्डुनि संहारं चामुण्डेश्वरि अवतारम् ॥ 2 ॥ पद्मरेकुल कान्तुललो बालात्रिपुरसुन्दरिगा हंसवाहनारूढिणिगा वेदमातवै वच्चितिवि ॥ 3 ॥ श्वेतवस्त्रमु धरियिञ्चि अक्षरमालनु पट्टुकॊनि भक्तिमार्गमु चूपितिवि ज्ञानज्योतिनि निम्पितिवि ॥ 4 ॥ नित्य अन्नदानेश्वरिगा काशीपुरमुन कॊलुवुण्ड आदिबिक्षुवै वच्चाडु साक्षादापरमेश्वरुडु ॥ 5 ॥ कदम्बवन सञ्चारिणिगा कामेश्वरुनि कलत्रमुगा कामितार्थ प्रदायिनिगा कञ्चि कामाक्षिवैनावु ॥ 6 ॥ श्रीचक्रराज निलयिनिगा श्रीमत् त्रिपुरसुन्दरिगा सिरि सम्पदलु इव्वम्मा श्रीमहालक्ष्मिगा रावम्मा ॥ 7 ॥ मणिद्वीपमुन कॊलुवुण्डि महाकालि अवतारमुलो महिषासुरुनि चम्पितिवि मुल्लोकालनु एलितिवि ॥ 8 ॥ पसिडि वॆन्नॆल कान्तुललो पट्टुवस्त्रपुधारणलो पारिजातपु मालललो पार्वति देविगा वच्चितिवि ॥ 9 ॥ रक्तवस्त्रमु धरियिञ्चि रणरङ्गमुन प्रवेशिञ्चि रक्तबीजुनि हतमार्चि रम्यकपर्दिनिवैनावु ॥ 10 ॥ कार्तिकेयुनिकि मातवुगा कात्यायिनिगा करुणिञ्चि कलियुगमन्ता कापाड कनकदुर्गवै वॆलिसितिवि ॥ 11 ॥ रामलिङ्गेश्वरु राणिविगा रविकुल सोमुनि रमणिविगा रमा वाणि सेवितगा राजराजेश्वरिवैनावु ॥ 12 ॥ खड्गं शूलं धरियिञ्चि पाशुपतास्त्रमु चेबूनि शुम्भ निशुम्भुल दुनुमाडि वच्चिन्दि श्रीश्यामलगा ॥ 13 ॥ महामन्त्राधिदेवतगा ललितात्रिपुरसुन्दरिगा दरिद्र बाधलु तॊलिगिञ्चि महदानन्दमु कलिगिञ्चे ॥ 14 ॥ अर्तत्राण परायणिवे अद्वैतामृत वर्षिणिवे आदिशङ्कर पूजितवे अपर्णादेवि रावम्मा ॥ 15 ॥ विष्णु पादमुन जनियिञ्चि गङ्गावतारमु ऎत्तितिवि भागीरथुडु निनु कॊलुव भूलोकानिकि वच्चितिवि ॥ 16 ॥ आशुतोषुनि मॆप्पिञ्चि अर्धशरीरं दाल्चितिवि आदिप्रकृति रूपिणिगा दर्शनमिच्चॆनु जगदम्बा ॥ 17 ॥ दक्षुनि इण्ट जनियिञ्चि सतीदेविगा चालिञ्चि अष्टादश पीठेश्वरिगा दर्शनमिच्चॆनु जगदम्बा ॥ 18 ॥ शङ्खु चक्रमु धरियिञ्चि राक्षस संहारमुनु चेसि लोकरक्षण चेसावु भक्तुल मदिलो निलिचावु ॥ 19 ॥ पराभट्टारिक देवतगा परमशान्त स्वरूपिणिगा चिरुनव्वुलनु चिन्दिस्तू चॆऋकु गडनु धरयिञ्चितिवि ॥ 20 ॥ पञ्चदशाक्षरि मन्त्राधितगा परमेश्वर परमेश्वरितो प्रमथगणमुलु कॊलुवुण्ड कैलासम्बे पुलकिञ्चे ॥ 21 ॥ सुरुलु असुरुलु अन्दरुनु शिरसुनु वञ्चि म्रॊक्कङ्गा माणिक्याल कान्तुलतो नी पादमुलु मॆरिसिनवि ॥ 22 ॥ मूलाधार चक्रमुलो योगिनुलकु आदीश्वरियै अङ्कुशायुध धारिणिगा भासिल्लॆनु श्री जगदम्बा ॥ 23 ॥ सर्वदेवतल शक्तुलचे सत्य स्वरूपिणि रूपॊन्दि शङ्खनादमु चेसितिवि सिंहवाहिनिगा वच्चितिवि ॥ 24 ॥ महामेरुवु निलयिनिवि मन्दार कुसुम माललतो मुनुलन्दरु निनु कॊलवङ्ग मोक्षमार्गमु चूपितिवि ॥ 25 ॥ चिदम्बरेश्वरि नी लील चिद्विलासमे नी सृष्टि चिद्रूपी परदेवतगा चिरुनव्वुलनु चिन्दिञ्चे ॥ 26 ॥ अम्बा शाम्भवि अवतारं अमृतपानं नी नामं अद्भुतमैनदि नी महिम अतिसुन्दरमु नी रूपम् ॥ 27 ॥ अम्मलगन्न अम्मवुगा मुग्गुरम्मलकु मूलमुगा ज्ञानप्रसूना रावम्मा ज्ञानमुनन्दरिकिव्वम्मा ॥ 28 ॥ निष्ठतो निन्ने कॊलिचॆदमु नी पूजलने चेसॆदमु कष्टमुलन्नी कडतेर्चि कनिकरमुतो ममु कापाडु ॥ 29 ॥ राक्षस बाधलु पडलेक देवतलन्ता प्रार्थिम्प अभयहस्तमु चूपितिवि अवतारमुलु दाल्चितिवि ॥ 30 ॥ अरुणारुणपु कान्तुललो अग्नि वर्णपु ज्वालललो असुरुलनन्दरि दुनुमाडि अपराजितवै वच्चितिवि ॥ 31 ॥ गिरिराजुनिकि पुत्रिकगा नन्दनन्दुनि सोदरिगा भूलोकानिकि वच्चितिवि भक्तुल कोर्कॆलु तीर्चितिवि ॥ 32 ॥ परमेश्वरुनिकि प्रियसतिगा जगमन्तटिकी मातवुगा अन्दरि सेवलु अन्दुकॊनि अन्तट नीवे निण्डितिवि ॥ 33 ॥ करुणिञ्चम्मा ललितम्मा कापाडम्मा दुर्गम्मा दर्शनमिय्यग रावम्मा भक्तुल कष्टं तीर्चम्मा ॥ 34 ॥ ए विधमुगा निनु कॊलिचिननु ए पेरुन निनु पिलिचिननु मातृहृदयवै दयचूपु करुणामूर्तिगा कापाडु ॥ 35 ॥ मल्लॆलु मॊल्ललु तॆच्चितिमि मनसुनु नीके इच्चितिमि मगुवलमन्ता चेरितिमि नी पारायण चेसितिमि ॥ 36 ॥ त्रिमातृरूपा ललितम्मा सृष्टि स्थिति लयकारिणिवि नी नाममुलु ऎन्नॆन्नो लॆक्किञ्चुट मा तरमवुना ॥ 37 ॥ आश्रितुलन्दरु रारण्डि अम्मरूपमु चूडण्डि अम्मकु नीराजनमिच्चि अम्म दीवॆन पॊन्दुदमु ॥ 38 ॥ सदाचार सम्पन्नवुगा सामगान प्रियलोलिनिवि सदाशिव कुटुम्बिनिवि सौभाग्यमिच्चे देवतवु ॥ 39 ॥ मङ्गलगौरी रूपमुनु मनसुल निण्डा निम्पण्डि महादेविकि मनमन्ता मङ्गल हारतुलिद्दामु ॥ 40 ॥