।।संतान गोपाल स्तोत्र।। ॐ - गोपालाय - विद्महे - गोपी-जन-वल्लभाय - धीमहि - तत् - नः - गोपालः - प्रचोदयात् ॐ - श्रीं - ह्रीं - क्लीं - ग्लौं - देवकी-सुत - गोविंद - वासुदेव - जगत्-पते - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः भूः - भुवः - सुवः - ॐ - इति - दिक्-विमोकः श्रीशम् - कमल-पत्र-अक्षम् - देवकी-नंदनम् - हरिम् - सुत-सम्प्राप्तये - कृष्णम् - नमामि - मधु-सूदनम् (1) नमामि - अहम् - वासुदेवम् - सुत-सम्प्राप्तये - हरिम् - यशोदा-अङ्क-गतम् - बालम् - गोपालम् - नन्द-नन्दनम् (2) अस्माकम् - पुत्र-लाभाय - गोविंदम् - मुनि-वंदितम् - नमामि - अहम् - वासुदेवम् - देवकी-नंदनम् - सदा (3) गोपालम् - डिंभकम् - वन्दे - कमला-पतिम् - अच्युतम् - पुत्र-सम्प्राप्तये - कृष्णम् - नमामि - यदु-पुंगवम् (4) पुत्र-काम-इष्टि-फलदम् - कंज-अक्षम् - कमला-पतिम् - देवकी-नंदनम् - वन्दे - सुत-सम्प्राप्तये - त्वहम् (5) पद्मा-पते - पद्म-नेत्र - पद्म-नाभ - जनार्दन - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - वासुदेव - जगत्-पते (6) यशोदा-अङ्क-गतम् - बालम् - गोविंदम् - मुनि-वंदितम् - अनन्त - पुत्र-लाभाय - नमामि - श्रीशम् - अच्युतम् (7) भूत-कृत् - भूत-भृत् - भावः - भूत-आत्मा - भूत-भावनः - गोविंद - मे - सुतम् - देहि - नमामि - त्वाम् - जनार्दन (8) भक्त-काम-द - गोविंद - भक्त-रक्षक - शुभ-प्रद - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - रुक्मिणी-वल्लभ - प्रभो (9) रुक्मिणी-नाथ - सर्व-ईश - देहि - मे - तनयम् - सदा - भक्त-मंदार - पद्म-अक्ष - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (10) देवकी-सुत - गोविंद - वासुदेव - जगत्-पते - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (11) वासुदेव - जगत्-वंद्य - श्री-पते - पुरुष-उत्तम - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (12) कंज-अक्ष - कमला-नाथ - पर-कारुणिक-उत्तम - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (13) लक्ष्मी-पते - पद्म-नाभ - मुकुंद - मुनि-वंदित - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (14) कार्य-कारण-रूपाय - वासुदेवाय - ते - सदा - नमामि - पुत्र-लाभ-अर्थम् - सुख-दाय - बुधाय - ते (15) राजीव-नेत्र - श्री-राम - रावण-अरे - हरे - कवे - तुभ्यम् - नमामि - देव-ईश - तनयम् - देहि - मे - हरे (16) अनन्त - पुत्र-लाभाय - भजामि - त्वाम् - जगत्-पते - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - वासुदेव - रमा-पते (17) श्री-मानिनी - मान-हारि - गोपी-वस्त्र-अपहारक - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - वासुदेव - जगत्-पते (18) अस्माकम् - पुत्र-सम्प्राप्तिम् - कुरुष्व - यदु-नंदन - रमा-पते - वासुदेव - मुकुंद - मुनि-वंदित (19) वासुदेव - सुतम् - देहि - तनयम् - देहि - माधव - पुत्रम् - मे - देहि - श्री-कृष्ण - वत्सम् - देहि - महा-प्रभो (20) डिंभकम् - देहि - श्री-कृष्ण - आत्मजम् - देहि - राघव - भक्त-मंदार - मे - देहि - तनयम् - नन्द-नन्दन (21) नन्दनम् - देहि - मे - कृष्ण - वासुदेव - जगत्-पते - कमला-नाथ - गोविंद - मुकुंद - मुनि-वंदित (22) अन्यथा - शरणम् - न - अस्ति - त्वम् - एव - शरणम् - मम - सुतम् - देहि - श्रियम् - देहि - श्रियम् - पुत्रम् - प्रदेहि - मे (23) यशोदा-स्तन्य-पान-ज्ञम् - पिबन्तम् - यदु-नन्दनम् - वन्दे - अहम् - पुत्र-लाभ-अर्थम् - कपिल-अक्षम् - हरिम् - सदा (24) नन्द-नन्दन - देव-ईश - नन्दनम् - देहि - मे - प्रभो - रमा-पते - वासुदेव - श्रियम् - पुत्रम् - जगत्-पते (25) पुत्रम् - श्रियम् - श्रियम् - पुत्रम् - पुत्रम् - मे - देहि - माधव - अस्माकम् - दीन-वाक्यम् - च - अवधारय - श्री-पते (26) गोपाल - डिंभ - गोविंद - वासुदेव - रमा-पते - अस्माकम् - डिंभकम् - देहि - श्रियम् - देहि - जगत्-पते (27) मत्-वाञ्छित-फलम् - देहि - देवकी-नन्दन - अच्युत - मम - पुत्र-अर्थितम् - धन्यम् - कुरुष्व - यदु-नन्दन (28) याचे - अहम् - त्वाम् - श्रियम् - पुत्रम् - देहि - मे - पुत्र-सम्पदम् - भक्त-चिन्तामणे - राम - कल्प-वृक्ष - महा-प्रभो (29) आत्मजम् - नन्दनम् - पुत्रम् - कुमारम् - डिंभकम् - सुतम् - अर्भकम् - तनयम् - देहि - सदा - मे - रघु-नन्दन (30) वन्दे - सन्तान-गोपालम् - माधवम् - भक्त-काम-दम् - अस्माकम् - पुत्र-सम्प्राप्त्यै - सदा - गोविंदम् - अच्युतम् (31) ॐकार-युक्तम् - गोपालम् - श्री-युक्तम् - यदु-नन्दनम् - क्लीं-युक्तम् - देवकी-पुत्रम् - नमामि - यदु-नायकम् (32) वासुदेव - मुकुन्द-ईश - गोविंद - माधव - अच्युत - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - रमा-नाथ - महा-प्रभो (33) राजीव-नेत्र - गोविंद - कपिल-अक्ष - हरे - प्रभो - समस्त - काम्य-वर-द - देहि - मे - तनयम् - सदा (34) पद्म-नाभ - श्याम-पद्म - वृन्द-रूप - जगत्-पते - सत्-पुत्रम् - देहि - मे - देव - रमा-नायक - माधव (35) नन्द-पाल - धरा-पाल - गोविंद - यदु-नन्दन - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - रुक्मिणी-वल्लभ - प्रभो (36) दास-मन्दार - गोविंद - मुकुन्द - माधव - अच्युत - गोपाल - पुंडरीक-अक्ष - देहि - मे - तनयम् - श्रियम् (37) यदु-नायक - पद्म-ईश - नन्द-गोप-वधू-सुत - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - श्रीधर - प्राण-नायक (38) अस्माकम् - वाञ्छितम् - देहि - देहि - पुत्रम् - रमा-पते - स्तुवताम् - कृष्ण - सर्व-ईश - वासुदेव - जगत्-पते (39) रमा-हृदय-सम्भार - सत्यभामा-मनः-प्रिय - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - रुक्मिणी-वल्लभ - प्रभो (40) चन्द्र-सूर्य-अक्ष - गोविंद - पुंडरीक-अक्ष - माधव - अस्माकम् - भाग्य-सत्-पुत्रम् - देहि - देव - जगत्-पते (41) कारुण्य-रूप - पद्म-अक्ष - पद्म-नाभ-समर्चित - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - देवकी-नन्द-नन्दन (42) देवकी-सुत - श्री-नाथ - वासुदेव - जगत्-पते - समस्त-काम-फल-द - देहि - मे - तनयम् - सदा (43) भक्त-मन्दार - गम्भीर - शंकर-अच्युत - माधव - देहि - मे - तनयम् - गोप-बाल-वत्सल - रमा-पते (44) श्री-पते - वासुदेव-ईश - देवकी-प्रिय-नन्दन - भक्त-मन्दार - मे - देहि - तनयम् - जगताम् - प्रभो (45) जगन्नाथ - रमा-नाथ - भूमि-नाथ - दया-निधे - वासुदेव-ईश - सर्व-ईश - देहि - मे - तनयम् - प्रभो (46) श्री-नाथ - कमल-पत्र-अक्ष - वासुदेव - जगत्-पते - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (47) दास-मन्दार - गोविंद - भक्त-चिन्तामणे - प्रभो - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (48) गोविंद - पुंडरीक-अक्ष - रमा-नाथ - महा-प्रभो - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (49) श्री-नाथ - कमल-पत्र-अक्ष - गोविंद - मधु-सूदन - सत्-पुत्र-फल-सिद्ध्यर्थम् - भजामि - त्वाम् - जनार्दन (50) स्तन्यम् - पिबन्तम् - जननी-मुख-अम्बुजम् - विलोक्य - मन्द-स्मितम् - उज्ज्वल-अङ्गम् - स्पृशन्तम् - अन्य-स्तनम् - अङ्गुलीभिः - वन्दे - यशोदा-अङ्क-गतम् - मुकुन्दम् (51) याचे - अहम् - पुत्र-सन्तानम् - भवन्तम् - पद्म-लोचन - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (52) अस्माकम् - पुत्र-सम्पत्तेः - चिन्तयामि - जगत्-पते - शीघ्रम् - मे - देहि - दातव्यम् - भवता - मुनि-वंदित (53) वासुदेव - जगन्नाथ - श्री-पते - पुरुष-उत्तम - कुरु - माम् - पुत्र-दत्तम् - च - कृष्ण - देव-इन्द्र-पूजित (54) कुरु - माम् - पुत्र-दत्तम् - च - यशोदा-प्रिय-नन्दन - मह्यम् - च - पुत्र-सन्तानम् - दातव्यम् - भवता - हरे (55) वासुदेव - जगन्नाथ - गोविंद - देवकी-सुत - देहि - मे - तनयम् - राम - कौसल्या-प्रिय-नन्दन (56) पद्म-पत्र-अक्ष - गोविंद - विष्णो - वामन - माधव - देहि - मे - तनयम् - सीता-प्राण-नायक - राघव (57) कंज-अक्ष - कृष्ण - देव-इन्द्र-मण्डित - मुनि-वंदित - लक्ष्मण-अग्रज - श्री-राम - देहि - मे - तनयम् - सदा (58) देहि - मे - तनयम् - राम - दशरथ-प्रिय-नन्दन - सीता-नायक - कंज-अक्ष - मुचुकुन्द-वर-प्रद (59) विभीषणस्य - या - लंका - प्रदत्ता - भवता - पुरा - अस्माकम् - तत्-प्रकारेण - तनयम् - देहि - माधव (60) भवदीय-पद-अम्भोजे - चिन्तयामि - निरन्तरम् - देहि - मे - तनयम् - सीता-प्राण-वल्लभ - राघव (61) राम - मत्-काम्य-वर-द - पुत्र-उत्पत्ति-फल-प्रद - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - कमलासन-वंदित (62) राम - राघव - सीता-ईश - लक्ष्मण-अनुज - देहि - मे - भाग्य-वत्-पुत्र-सन्तानम् - दशरथ-आत्मज - श्री-पते (63) देवकी-गर्भ-संजात - यशोदा-प्रिय-नन्दन - देहि - मे - तनयम् - राम - कृष्ण - गोपाल - माधव (64) कृष्ण - माधव - गोविंद - वामन - अच्युत - शंकर - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (65) गोप-बाल - महा-धन्य - गोविंद - अच्युत - माधव - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - वासुदेव - जगत्-पते (66) दिशतु - दिशतु - पुत्रम् - देवकी-नन्दनः - अयम् - दिशतु - दिशतु - शीघ्रम् - भाग्य-वत्-पुत्र-लाभम् - दिशतु - दिशतु - श्रीशः - राघवः - राम-चन्द्रः - दिशतु - दिशतु - पुत्रम् - वंश-विस्तार-हेतोः (67) दीयताम् - वासुदेवेन - तनयः - मत्-प्रियः - सुतः - कुमारः - नन्दनः - सीता-नायक-विशदः - मम (68) राम - राघव - गोविंद - देवकी-सुत - माधव - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (69) वंश-विस्तार-कम् - पुत्रम् - देहि - मे - मधु-सूदन - सुतम् - देहि - सुतम् - देहि - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (70) मम-अभीष्ट-सुतम् - देहि - कंस-अरे - माधव - अच्युत - सुतम् - देहि - सुतम् - देहि - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (71) चन्द्र-अर्क-कल्प-पर्यन्तम् - तनयम् - देहि - माधव - सुतम् - देहि - सुतम् - देहि - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (72) विद्या-वन्तम् - बुद्धि-वन्तम् - श्री-वन्तम् - तनयम् - सदा - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - देवकी-नन्दन - प्रभो (73) नमामि - त्वाम् - पद्म-नेत्र - सुत-लाभाय - काम-दम् - मुकुन्दम् - पुंडरीक-अक्षम् - गोविंदम् - मधु-सूदनम् (74) भगवन् - कृष्ण - गोविंद - सर्व-काम-फल-प्रद - देहि - मे - तनयम् - स्वामिन् - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (75) स्वामिन् - त्वम् - भगवन् - राम - कृष्ण - माधव - काम-द - देहि - मे - तनयम् - नित्यम् - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (76) तनयम् - देहि - गोविंद - कंज-अक्ष - कमला-पते - सुतम् - देहि - सुतम् - देहि - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (77) पद्मा-पते - पद्म-नेत्र - प्रद्युम्न-जनक - प्रभो - सुतम् - देहि - सुतम् - देहि - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (78) शंख-चक्र-गदा-खड्ग - शार्ङ्ग-पाणे - रमा-पते - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (79) नारायण - रमा-नाथ - राजीव-पत्र-लोचन - सुतम् - मे - देहि - देव-ईश - पद्म-पद्म-अनु-वंदित (80) राम - माधव - गोविंद - देवकी-वर-नन्दन - रुक्मिणी-नाथ - सर्व-ईश - नारद-आदि-सुर-अर्चित (81) देवकी-सुत - गोविंद - वासुदेव - जगत्-पते - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (82) मुनि-वंदित - गोविंद - रुक्मिणी-वल्लभ - प्रभो - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (83) गोपिका-अर्जित-पंकेज-मकरन्द-आसक्त-मानस - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (84) रमा-हृदय-पंकेज-लोल - माधव - काम-द - मम-अभीष्ट-सुतम् - देहि - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (85) वासुदेव - रमा-नाथ - दासानाम् - मंगल-प्रद - देहि - मे - तनयम् - कृष्ण - त्वाम् - अहम् - शरणम् - गतः (86) कल्याण-प्रद - गोविंद - मुर-अरे - मुनि-वंदित - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (87) पुत्र-प्रद - मुकुन्द-ईश - रुक्मिणी-वल्लभ - प्रभो - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (88) पुंडरीक-अक्ष - गोविंद - वासुदेव - जगत्-पते - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (89) दया-निधे - वासुदेव - मुकुन्द - मुनि-वंदित - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (90) पुत्र-सम्पत्-प्रदातारम् - गोविंदम् - देव-पूजितम् - वन्दामहे - सदा - कृष्णम् - पुत्र-लाभ-प्रदायिनम् (91) कारुण्य-निधये - गोपी-वल्लभाय - मुर-अरये - नमस्ते - पुत्र-लाभ-अर्थम् - देहि - मे - तनयम् - विभो (92) नमः - तस्मै - रम-ईशाय - रुक्मिणी-वल्लभाय - ते - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (93) नमः - ते - वासुदेवाय - नित्य-श्री-कामुकाय - च - पुत्र-दाय - च - सर्प-इन्द्र-शायिने - रंग-शायिने (94) रंग-शायिन् - रमा-नाथ - मंगल-प्रद - माधव - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (95) दासस्य - मे - सुतम् - देहि - दीन-मन्दार - राघव - सुतम् - देहि - सुतम् - देहि - पुत्रम् - देहि - रमा-पते (96) यशोदा-तनय-अभीष्ट - पुत्र-दान-रतः - सदा - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (97) मत्-इष्ट-देव - गोविंद - वासुदेव - जनार्दन - देहि - मे - तनयम् - श्रीश - गोप-बालक-नायक (98) नीति-मान् - धन-वान् - पुत्रः - विद्या-वान् - च - प्रजा-पते - भगवन् - त्वत्-कृपायाः - च - वासुदेव-इन्द्र-पूजित (99) यः - पठेत् - पुत्र-शतकम् - सः - अपि - सत्-पुत्र-वान् - भवेत् - श्री-वासुदेव-कथितम् - स्तोत्र-रत्नम् - सुखाय - च (100) जप-काले - पठेत् - नित्यम् - पुत्र-लाभम् - धनम् - श्रियम् - ऐश्वर्यम् - राज-सम्मानम् - सद्यः - याति - न - संशयः (101)