|| श्री नाग पंचमी आरती || आरती श्री नागदेव जी कीजै ।। तन मन धन सब अर्पण कीजै । नेत्र लाल भिरकुटी विशाला । चले बिन पैर सुने बिन काना । उनको अपना सर्वस्व दीजे।। आरती श्री नागदेव जी कीजै ।। पाताल लोक में तेरा वासा । शंकर विघन विनायक नासा । भगतों का सर्व कष्ट हर लिजै।। आरती श्री नागदेव जी कीजै ।। शीश मणि मुख विषम ज्वाला । दुष्ट जनों का करे निवाला । भगत तेरो अमृत रस पिजे।। आरती श्री नागदेव जी कीजै ।। वेद पुराण सब महिमा गावें । नारद शारद शीश निवावें । सावल सा से वर तुम दीजे।। आरती श्री नागदेव जी कीजै ।। नोंवी के दिन ज्योत जगावे । खीर चूरमे का भोग लगावे । रामनिवास तन मन धन सब अर्पण कीजै । आरती श्री नागदेव जी कीजै ।। || इति श्री नाग पंचमी आरती ||