।।शिव स्तुति ।।
।।शिव स्तुति ।।
आशुतोष शशांक शेखर
चन्द्र मौली चिदंबरा
कोटि कोटि प्रणाम शम्भू
कोटि नमन दिगम्बरा ॥ १ ॥
निर्विकार ओंकार अविनाशी
तुम्हीं देवाधि देव
जगत सर्जक प्रलय करता
शिवम् सत्यम् सुन्दरा ॥ २ ॥
निरंकार स्वरूप कालेश्वर
महायोगीश्वरा
दयानिधि दानेश्वर जय
जटाधार अभयंकरा ॥ ३ ॥
शूलपाणि त्रिशूलधारी
औघड़ बाघम्बरी
जय महेश त्रिलोचनाय
विश्वनाथ विशम्भरा ॥ ४ ॥
नाथ नागेश्वर हर हर
पाप शाप अभिशाप तम
महादेव महान भोले
सदा शिव शिव शंकरा ॥ ५ ॥
जगतपति अनुरक्ति भक्ति
सदैव तेरे चरण हो
क्षमा हो अपराध सब
जय जयति जगदीश्वरा ॥ ६ ॥
जनम जीवन जगत का
संताप ताप मिटे सभी
ॐ नमः शिवाय मन
जपता रहे पंचाक्षरा ॥ ७ ॥
।। स्तुति संपूर्णम।।
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भावार्थ (श्लोक क्रम से)
१. हे शीघ्र प्रसन्न होने वाले, चन्द्रशेखर, दिगम्बर शम्भु! आपको बार-बार प्रणाम।
२. आप अविनाशी ओंकार स्वरूप हैं, सृष्टि और प्रलय के कारण, सत्य और सुन्दर हैं।
३. आप निराकार, काल के स्वामी, महायोगी, करुणा और दान के भंडार हैं।
४. त्रिशूलधारी, त्रिनेत्रधारी, विश्वनाथ महेश्वर की जय हो।
५. हे नागेश्वर! हमारे पाप, शाप और अज्ञान का नाश करने वाले आप ही हैं।
६. हे जगदीश्वर! हमें आपके चरणों में निष्काम भक्ति और क्षमा प्राप्त हो।
७. जीवन के सभी कष्ट मिटें और मन निरंतर “ॐ नमः शिवाय” का जप करता रहे।
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पूजन विधि
पाठ की विधि:
समय: प्रातः ब्रह्ममुहूर्त, सोमवार, प्रदोष काल या महाशिवरात्रि
आसन: कुश, ऊन या शांत स्थान पर बैठकर
भाव: श्रद्धा, नम्रता और समर्पण
संख्या: 1, 3 या 11 बार
साथ में: “ॐ नमः शिवाय” का जप करना श्रेष्ठ
कब और क्यों पढ़ें:
मन अशांत हो
जीवन में बाधाएँ हों
शिव भक्ति बढ़ाने के लिए
रुद्राभिषेक या शिव पूजन के बाद
आत्मशुद्धि और ध्यान के लिए
लाभ एवं महत्व
इस शिव स्तुति के लाभ:
🌿 मानसिक शांति और भय से मुक्ति
🔱 पापबोध, नकारात्मकता और तनाव का नाश
🕉️ भक्ति, वैराग्य और आत्मबल की वृद्धि
🌸 शिव कृपा से जीवन में स्थिरता और संतुलन
🙏 पंचाक्षर मंत्र जप की सिद्धि में सहायक