🔹 श्लोक १ – भावार्थ
भगवान नारायण अपने वात्सल्य से अभय देने वाले हैं, दुःखियों की पीड़ा हरने वाले हैं
उदारता से पापों का नाश करते हैं
असंख्य कल्याण प्रदान करते हैं
इसी कारण केवल वही श्रीपति पूज्य हैं
इस सत्य के साक्षी प्रह्लाद, विभीषण, गजेंद्र, द्रौपदी, अहल्या और ध्रुव हैं
🔹 श्लोक २ – भावार्थ
प्रह्लाद के वचनों पर
खंभे से प्रकट होकर
नृसिंह रूप में हरि ने
हिरण्यकशिपु का वध किया
और भक्त की रक्षा की
ऐसे आर्तत्राण नारायण ही मेरी शरण हैं
🔹 श्लोक ३ – भावार्थ
विभीषण शत्रु होकर भी
शरणागत हुआ
श्रीराम ने उसे अभय दिया
और स्वीकार किया
वह शरणागत-रक्षक नारायण मेरी गति हैं
🔹 श्लोक ४ – भावार्थ
गजेंद्र को मगर से मुक्त कर
हरि ने चक्र से रक्षा की
देव भी असहाय थे
वह भय-हरण नारायण मेरी शरण हैं
🔹 श्लोक ५ – भावार्थ
द्रौपदी की पुकार पर
कृष्ण ने अक्षय वस्त्र दिया
और लज्जा बचाई
वह करुणामय नारायण मेरी गति हैं
🔹 श्लोक ६ – भावार्थ
जिनके चरणामृत से पाप नष्ट होते हैं
जिनका नाम संसार से तारता है
जिनकी चरण-रज से अहल्या मुक्त हुई
वह नारायण मेरी शरण हैं
🔹 श्लोक ७ – भावार्थ
ध्रुव ने अपमान सहकर
नारायण की शरण ली
और अचल पद प्राप्त किया
वह भक्तवत्सल नारायण मेरी गति हैं
🔹 श्लोक ८ – भावार्थ
जो भयभीत, रोगी, दुःखी हैं
वे केवल “नारायण” नाम के कीर्तन से
दुःख से मुक्त होकर सुखी हो जाते हैं
🔱 पाठ-विधि (साधारण एवं शुद्ध)
🔸 समय
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त
या सायंकाल संध्या
संकट, भय, रोग में कभी भी
🔸 आसन
कुशासन या ऊनी आसन
उत्तर या पूर्व मुख
🔸 पूर्वकर्म
आचमन
प्राणायाम (ॐ नमो नारायणाय 3 बार)
दीप प्रज्वलन
श्रीनारायण का ध्यान
🔸 ध्यान (संक्षिप्त)
शान्तं पद्मासनस्थं शशिधरमुकुटं
पीतवस्त्रं चतुर्भुजम्
शङ्खचक्रगदापद्मैः अलंकृतकरं
नारायणं चिन्तयामि
🔸 पाठ
स्तोत्र का १, ३ या ८ बार पाठ
अंत में ॐ नमो नारायणाय 11 या 108 बार
🔱 प्रयोग (विशेष फल हेतु)
🔹 1. भय-निवारण प्रयोग
शनिवार या एकादशी
11 दिन
प्रतिदिन 8 पाठ
➡️ अकाल भय, शत्रु, मानसिक त्रास नष्ट होता है
🔹 2. रोग-शान्ति प्रयोग
रोगी के सामने दीप रखकर
7 दिन
प्रतिदिन 3 पाठ
➡️ विशेषतः मानसिक रोग, भयजन्य रोगों में फलदायी
🔹 3. संकट-मोचन प्रयोग
जल पात्र सामने रखें
8 पाठ कर जल पर फूँकें
उस जल को ग्रहण करें
➡️ आकस्मिक संकट, मुकदमे, अपमान से रक्षा
🔹 4. भक्ति-वैराग्य सिद्धि
एकादशी व्रत में
21 या 41 दिन
प्रतिदिन 1 पाठ
➡️ हृदय में नारायण-भक्ति स्थिर होती है
🔱 रहस्य (तत्त्वार्थ)
🔸 यह स्तोत्र मंत्र नहीं, भाव-प्रधान शरणागति स्तोत्र है
🔸 हर श्लोक में इतिहासिक प्रमाण है—
प्रह्लाद → अहंकार नाश
विभीषण → शरणागत रक्षा
गजेंद्र → अकाल संकट
द्रौपदी → मान-रक्षा
अहल्या → पाप-मोचन
ध्रुव → अचल पद
🔸 अंतिम श्लोक बताता है—
केवल “नारायण” नाम-स्मरण से
घोर दुःख भी नष्ट हो जाते हैं