।।अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम्।। (पद-विच्छेद सहित) 🪔 आदिलक्ष्मी (१) सुमनसः वन्दित सुन्दरी माधवि चन्द्र सहोदरी हेममये मुनिगण वन्दित मोक्ष प्रदायनि मञ्जुल भाषिणि वेद नुते पङ्कज वासिनि देव सुपूजित सद्गुण वर्षिणि शान्ति युते जय जय हे मधुसूदन कामिनि आदि लक्ष्मि परिपालय माम् ॥ १ ॥ 🌾 धान्यलक्ष्मी (२) अयि कलि कल्मष नाशिनि कामिनि वैदिक रूपिणि वेद मये क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि मन्त्र निवासिनि मन्त्र नुते मङ्गल दायिनि अम्बुज वासिनि देव गणाश्रित पाद युते जय जय हे मधुसूदन कामिनि धान्य लक्ष्मि परिपालय माम् ॥ २ ॥ 🛡️ धैर्यलक्ष्मी (३) जय वर वर्षिणि वैष्णवि भार्गवि मन्त्र स्वरूपिणि मन्त्र मये सुर गण पूजित शीघ्र फल प्रद ज्ञान विकासिनि शास्त्र नुते भव भय हारिणि पाप विमोचनि साधु जनाश्रित पाद युते जय जय हे मधुसूदन कामिनि धैर्य लक्ष्मि परिपालय माम् ॥ ३ ॥ 🐘 गजलक्ष्मी (४) जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि सर्व फल प्रद शास्त्र मये रथ गज तुरग पदाति समावृत परिजन मण्डित लोक नुते हरि हर ब्रह्म सुपूजित सेवित ताप निवारिणि पाद युते जय जय हे मधुसूदन कामिनि गज लक्ष्मि रूपेण पालय माम् ॥ ४ ॥ 👶 सन्तानलक्ष्मी (५) अयि खग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि राग विवर्धिनि ज्ञान मये गुण गण वारधि लोक हितैषिणि सप्त स्वर भूषित गान नुते सकल सुरासुर देव मुनीश्वर मानव वन्दित पाद युते जय जय हे मधुसूदन कामिनि सन्तान लक्ष्मि परिपालय माम् ॥ ५ ॥ 🏆 विजयलक्ष्मी (६) जय कमलासिनि सद्गति दायिनि ज्ञान विकासिनि गान मये अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर भूषित वासित वाद्य नुते कनक धरा स्तुति वैभव वन्दित शङ्कर देशिक मान्य पदे जय जय हे मधुसूदन कामिनि विजय लक्ष्मि परिपालय माम् ॥ ६ ॥ 📚 विद्यालक्ष्मी (७) प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि शोक विनाशिनि रत्न मये मणि मय भूषित कर्ण विभूषण शान्ति समावृत हास्य मुखे नव निधि दायिनि कलि मल हारिणि कामित फल प्रद हस्त युते जय जय हे मधुसूदन कामिनि विद्या लक्ष्मि परिपालय माम् ॥ ७ ॥ 💰 धनलक्ष्मी (८) धिमि धिमि धिन्धिमि धिन्धिमि दिन्धिमि दुन्दुभि नाद सुपूर्ण मये घुम घुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम शङ्ख निनाद सुवाद्य नुते वेद पुराण इतिहास सुपूजित वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते जय जय हे मधुसूदन कामिनि धन लक्ष्मि रूपेण पालय माम् ॥ ८ ॥ ********************************