।। सहस्ररुपिणी सिद्धलक्ष्मी महाविद्या ।। विनियोगः- ॐ अस्य श्री सर्व महाविद्या महालक्ष्मी शताष्टोत्तरी महाराज्ञी रहस्याति रहस्यमयी पराशक्ति श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी सहस्ररूपिणी महाविद्याया श्री विश्वामित्र ऋषिः गायत्र्यादि नाना छन्दासि, नवकोटि शक्तिरूपा श्री मदाद्या भगवती सिद्ध लक्ष्मी सहस्र रूपिणी देवता श्री मदाद्या भगवती सिद्धलक्ष्मी प्रसादादखिले वांछित कामना सिद्धयर्थे पाठे विनियोगः॥ ॥ऋष्यादि न्यास॥ श्री विश्वामित्र ऋषिभ्यो - शिरसे नमः। गायत्र्यादि नाना छन्देभ्यो नमः - मुखे। नवकोटि शक्तिरूपा श्री मदाद्या भगवती सिद्धलक्ष्मी सहस्र रूपिणी देवतायै नमः -हृदि॥ श्री मदाद्या भगवती सिद्धलक्ष्मी प्रसादादखिले वाँछित कामना सिद्धयर्थे पाठे विनियोगाय नमः - सर्वाङ्गे। ॥ध्यान॥ या माया मधुकैटथ प्रमथिनी या माहिषोन्मूलिनी या धुम्रेक्षण चण्ड मुण्ड दलनी या रक्त बीजशानी॥ शक्तिः शुम्भ निशुम्भ दैत्य मथनी या सिद्धलक्ष्मी परा सा देवी नवकोटि मूर्ति सहिता मां पातु विश्वेश्वरि॥ ॥सहस्त्ररूपिणी सिद्धलक्ष्मी महाविद्या मंत्र॥ ॐ ऐं ह्रीं श्रीं ह्सौं श्रीं ऐं ह्रीं क्लीं सौ: सौ: ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं जय जय महालक्ष्मी, जगदाद्ये, विजये, सुरासुर त्रिभुवन निदाने ,दयांकुरे, सर्वदेव तेजोरूपिणी, विरंचि संस्थिते, विधिवरदे, सच्चिदानंदे, विष्णु देहावृत्ते, महामोहिनी, अटूट धन सम्पत्ति घोषिणी, नित्य वरदान तत्परे, महासुधाब्धि वासिनी, महातेजो धारिणी, सर्वाधारे, सर्वकारण कारिण्यै, अचिन्त्य रुपे, इन्द्रादि-सकल-देव-सेविते, साम गान गायन परिपूर्णोदय कारिणी, विजये, जयंति, अपराजिते, सर्व सुन्दरि, पीतांकुशे सूर्य कोटि संकाशे, चन्द्र कोटि सुशीतले,सहस्र रूपिणी़ महालक्ष्मी मां रक्ष रक्ष, मोक्ष मार्गाणि दर्शय दर्शय ज्ञान मार्ग प्रकाशय प्रकाशय,अज्ञान तमो नाशय नाशय,धन धान्यादि वृद्धिं कुरु कुरु,सर्व कल्याणानि कल्पय कल्पय,सर्वोपद्रव निस्तारय निस्तारय,सर्व संसिद्धिं देहि देहि फट्॥ *********************